आम धारणा के विपरीत, मानव विकास (evolution) एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका उदाहरण तिब्बती पठार पर रहने वाले लोग हैं। ये लोग अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबे समय से जीवित रहने के लिए जैविक रूप से अनुकूलित हो चुके हैं। समय के साथ उनके शरीर में ऐसे बदलाव आए हैं जो कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी जीवित रहने में मदद करते हैं। यह प्राकृतिक चयन (natural selection) का एक स्पष्ट उदाहरण माना जाता है। शोध के अनुसार, इन अनुकूलनों में कुछ जीन ऐसे भी शामिल हैं जो प्राचीन मानव प्रजातियों से विरासत में मिले हैं। यह दर्शाता है कि मानव शरीर अभी भी पर्यावरणीय दबावों के अनुसार बदल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया हजारों वर्षों में विकसित हुई है। तिब्बती लोगों की यह क्षमता उन्हें दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में जीवित रहने में मदद करती है। अध्ययन यह भी साबित करते हैं कि विकास एक स्थिर प्रक्रिया नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली जैविक घटना है। यह खोज मानव विकास की समझ को और गहरा बनाती है।
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