छह वर्षीय एक बच्ची, जिसने कैंसर का सफल इलाज कराया था, एक खास पहल के तहत उसी अस्पताल में फिर लौटी। इस बार वह मरीज नहीं, बल्कि ‘एक दिन की डॉक्टर’ बनकर अस्पताल पहुंची। अस्पताल प्रशासन ने उसके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। बच्ची ने डॉक्टरों का कोट पहनकर अस्पताल के विभिन्न विभागों का दौरा किया। इस दौरान उसने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समय बिताया। कार्यक्रम का उद्देश्य उसकी बहादुरी का सम्मान करना और अन्य बच्चों को प्रेरित करना था। इलाज के दौरान उसकी हिम्मत और सकारात्मक सोच की सभी ने सराहना की थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने इस पल को भावुक और प्रेरणादायक बताया। बच्ची की मुस्कान और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। यह पहल गंभीर बीमारी से उबर चुके बच्चों के लिए उम्मीद, साहस और नए जीवन का प्रतीक बनकर सामने आई।
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