सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1979 में दिए गए त्वरित न्याय के निर्देश आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। नई आपराधिक कानून व्यवस्था लागू होने के बावजूद न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों की संख्या लगातार बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों के बाद दर्ज मामलों में भी देरी देखी जा रही है। लगभग 40 प्रतिशत से अधिक मामलों में सुनवाई शुरू होने से पहले ही देरी हो रही है। कुल मिलाकर 1.85 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया की गति और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतों पर बढ़ता बोझ इस देरी का प्रमुख कारण है। कई मामलों में जांच और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो रही है। इसके कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। न्याय व्यवस्था में सुधार और संसाधनों की कमी को दूर करने की आवश्यकता बताई जा रही है। यह स्थिति ‘स्पीडी ट्रायल’ के लक्ष्य को अभी भी चुनौती दे रही है।
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