छत्तीसगढ़ में क्षत्रिय करणी सेना के आंतरिक विवाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने स्पष्ट किया है कि अभिषेक सिंह का 220 पदाधिकारियों के साथ संगठन छोड़ने का दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। उन्होंने कहा कि अभिषेक सिंह कभी भी विधिवत प्रदेश अध्यक्ष नहीं थे, बल्कि उन्हें सीमित अवधि के लिए कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई थी। संगठन के संविधान और अनुशासन के विपरीत गतिविधियों के चलते उन्हें हटाना पड़ा। प्रदेश के अधिकृत अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ही हैं। संगठन ने यह भी कहा कि अभिषेक सिंह के पास वास्तविक सदस्यता रिकॉर्ड तक नहीं था, इसलिए उनका दावा फिजूल है। अधिकतर जिला और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी आज भी करणी सेना के साथ हैं। यह विवाद तोमर बंधुओं के मामले में आंदोलन के बाद शुरू हुआ था। शेखावत ने कहा कि करणी सेना किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर टिकी है।
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