विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो के विकसित होने की संभावना तेजी से बढ़ रही है। संगठन के अनुसार इसके बनने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एल नीनो की स्थिति भारत के मानसून को कमजोर कर सकती है। इसका असर देश के चार महीने लंबे वर्षा मौसम पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुवाई पर इसका असर पड़ सकता है। WMO ने कहा है कि एल नीनो की स्थिति मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है। इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना जताई गई है। भारत सहित कई देशों में मौसम की चरम घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। सूखा, अत्यधिक गर्मी और अनियमित वर्षा जैसी परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम में बदलाव का असर खाद्य उत्पादन और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है। वैज्ञानिक लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सरकारों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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