अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना जताई जा रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ा बदलाव आ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 6.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल एशियाई बाजारों में पहुंच सकता है। इससे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। पहले जहां बाजार में आपूर्ति की कमी को लेकर चिंता थी, अब स्थिति अतिरिक्त आपूर्ति की ओर बढ़ रही है। एशियाई रिफाइनर पहले से पर्याप्त स्टॉक के कारण अपने संचालन में कमी कर रहे हैं। ज्यादा तेल उपलब्ध होने से बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही है। बाजार में कॉन्टैंगो की स्थिति भी देखने को मिल रही है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच तेल बाजार की दिशा तेजी से बदल रही है। आने वाले दिनों में आपूर्ति और मांग का संतुलन कीमतों को प्रभावित करेगा।
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