भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 2 जून से शुरू हो रही है, जो बढ़ती महंगाई और मध्य पूर्व में तनाव के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों को स्थिर रखने पर जोर देगा, यानी दरों में न तो बढ़ोतरी और न ही कटौती की संभावना है। हालाँकि, वित्तीय वर्ष के उत्तरार्ध में मौद्रिक नीति को और कड़ा किया जा सकता है। रिजर्व बैंक अपने मुद्रास्फीति और जीडीपी वृद्धि के अनुमानों को भी संशोधित कर सकता है। खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अप्रैल में 4.8% पर थी, जो RBI के ऊपरी बैंड (6%) से नीचे तो है, लेकिन खाद्य कीमतों में उछाल और कच्चे तेल की कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है। RBI से लिक्विडिटी नियंत्रण के उपायों की भी उम्मीद है। बैठक के परिणाम 5 जून को घोषित किए जाएंगे। निवेशक और बाजार इस निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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