साइबर ठगी के एक पुराने मामले में अदालत ने एक आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत का कहना है कि खाते में पैसे आना जुर्म नहीं माना जा सकता। यह मामला 2022 में हुआ था और 2023 में गिरफ्तारी हुई थी। अदालत ने कहा कि खाते में ठगी रकम आ जाना मात्र अपराध नहीं है। आरोपी को बरी करने के पीछे अदालत का यही तर्क है। अदालत के इस फैसले से साइबर अपराधों के मामले में नये सिरे से विचार की जरूरत है। यह मामला साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अदालत के फैसले का स्वागत किया जा रहा है।
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