CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्रों द्वारा लगातार अंकों में त्रुटियों की शिकायत की जा रही है। अब खबर है कि स्कूलों के प्रिंसिपलों को इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का ऑनलाइन बचाव करने के लिए कहा गया है। इससे तकनीकी खामियों से ध्यान हटाकर कथा-नियंत्रण (नैरेटिव कंट्रोल) पर जोर देने का प्रयास लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परीक्षाओं के लिए सबसे जरूरी जनविश्वास कमजोर हो रहा है। छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के बजाय छवि प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रिंसिपलों को ऑनलाइन बचाव के लिए प्रेरित करने के आरोपों से अभिभावकों और छात्रों में रोष है। CBSE ने अब तक इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। हालांकि, बोर्ड का कहना है कि वह सभी शिकायतों का समाधान करेगा। यह स्थिति शिक्षा जगत में एक नया संकट पैदा कर सकती है। अब देखना यह है कि CBSE अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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