Google, Microsoft, Uber जैसी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, लेकिन अब वे बढ़ती लागत (rising costs) और सीमित रिटर्न (limited returns) को लेकर चिंतित हो गई हैं। कंपनियों को एहसास हो रहा है कि AI को प्रोडक्ट में बदलना और उससे मुनाफा कमाना आसान नहीं है। ऊर्जा खपत, डाटा सेंटर और हाई-एंड चिप्स की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। वहीं, AI टूल्स से अब तक उतना रेवेन्यू नहीं आया है, जितना खर्च किया जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि AI का हाइप (hype) अपने चरम पर है और अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह टिकाऊ (sustainable) होगा। कंपनियां अब AI को व्यावहारिक उपयोगों (practical applications) में लाने पर जोर दे रही हैं। केवल वही कंपनियां टिक पाएंगी जो AI को किफायती और स्केलेबल बनाएंगी। यह AI के लिए ‘रियलिटी चेक’ का दौर है।
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