आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विस्तार के साथ एक नई पर्यावरणीय चिंता सामने आ रही है। दुनिया भर में AI को संचालित करने वाले डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में मीठे पानी का उपयोग कर रहे हैं। इन केंद्रों में लगे सर्वर अत्यधिक गर्मी पैदा करते हैं, जिन्हें ठंडा रखने के लिए भारी जल संसाधनों की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ पानी की खपत भी लगातार बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में डेटा सेंटर स्थानीय जल स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं। इससे पहले से जल संकट झेल रहे इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि जल उपयोग को लेकर प्रभावी नीतियां नहीं बनाई गईं तो दीर्घकालिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बड़ी तकनीकी कंपनियां अब अधिक जल-कुशल शीतलन प्रणालियां विकसित करने पर काम कर रही हैं। कुछ संस्थान पुनर्चक्रित पानी और वैकल्पिक कूलिंग तकनीकों का भी उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद AI उद्योग की तेज वृद्धि जल संसाधनों के लिए चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञ पारदर्शिता बढ़ाने और डेटा सेंटरों की जल खपत के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन के बीच उचित तालमेल जरूरी है। AI के विकास के साथ जल संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
Source: Source