सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की नई त्रिभाषा नीति के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और बोर्ड को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं ने 9वीं और 10वीं कक्षा में तीन भाषाएं अनिवार्य किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह नियम छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डालता है और उनका बोझ बढ़ाता है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा कि आखिर क्यों छात्रों पर यह बोझ थोपा जा रहा है। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और CBSE को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह देखना चाहता है कि क्या यह नीति संविधान के अनुसार है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखती है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नीति हिंदी और अंग्रेजी के अलावा तीसरी भाषा सीखने के लिए छात्रों को विवश करती है। कई राज्यों में तीसरी भाषा के लिए शिक्षकों और संसाधनों की कमी है, जिससे असमानता बढ़ सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुनवाई 15 या 16 जुलाई को होगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि त्रिभाषा फॉर्मूला स्वैच्छिक होना चाहिए, अनिवार्य नहीं। इस फैसले से देश भर के लाखों छात्रों पर असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नीति की व्यावहारिकता और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक बोझ की गहन जांच करेगा।
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