कर्नाटक के नेताओं को लगता है कि सीएम की कुर्सी शापित है। नेताओं को लगता है कि जो भी इस कुर्सी पर बैठता है, उसका भविष्य खतरे में पड़ जाता है। यह डर नेताओं को सताता रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि नेताओं ने अपने-अपने तरीके से इस डर का उपचार किया है। कुछ नेताओं ने धार्मिक अनुष्ठान किए, जबकि कुछ ने राजनीतिक चालें चलीं। नेताओं का मानना है कि यह कुर्सी शापित है और इससे बचने के लिए उन्हें सावधान रहना होगा। कर्नाटक के नेताओं की 这 समस्या पुरानी है और इससे निपटने के लिए उन्हें समाधान ढूंढना होगा। यह समस्या नेताओं के लिए बड़ी चुनौती है और उन्हें इसका सामना करना होगा।
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