भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण और अडानी समूह द्वारा इसे खरीदने की चर्चाओं के बीच प्रबंधन ने इन खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। रविवार, 18 अक्टूबर को जारी बयान में प्रबंधन ने प्लांट को बेचने की योजना से जुड़ी खबरों का खंडन किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अडानी समूह के प्रतिनिधियों के BSP दौरे की संभावनाओं को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि BSP छत्तीसगढ़ की पहचान है और इसे किसी भी हाल में बिकने नहीं दिया जाएगा। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी निजीकरण का विरोध करते हुए संयंत्र को बचाने के लिए संघर्ष करने की बात कही थी। इसके जवाब में भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं से अपने दावों के सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता निजीकरण को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। सेन ने यह भी कहा कि यदि संयंत्र को बेचने की कोशिश हुई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। BSP प्रबंधन के अनुसार, इस्पात मंत्रालय ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इन दावों का खंडन किया है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने भी निजीकरण से जुड़ी खबरों को झूठा बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, BSP और अडानी टोटल गैस लिमिटेड के बीच पाइप से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए 16 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य संयंत्र और टाउनशिप में गैस पहुंचाना है, और इसी सिलसिले में अधिकारियों के दौरे की चर्चा हुई थी। भूपेश बघेल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बचाना महत्वपूर्ण मुद्दा है और भाजपा विधायक को इस विषय पर केंद्र सरकार से सवाल करना चाहिए। फिलहाल BSP प्रबंधन ने निजीकरण की खबरों को निराधार बताया है, जबकि राजनीतिक नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी है।
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