पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और लुधियाना वेस्ट से विधायक संजीव अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग और जीएसटी धोखाधड़ी मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। यह मामला करीब 100 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद से संजीव अरोड़ा हिरासत में हैं और गुरुग्राम जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान ईडी से मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। ईडी ने अदालत में अपनी रिपोर्ट और संबंधित साक्ष्य पेश किए। अदालत ने रिपोर्ट और सबूतों से संभावित छेड़छाड़ की आशंका को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत ने 15 जून को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद संजीव अरोड़ा ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल जमानत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई को उनकी मेडिकल जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि नियमित जमानत का मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। गिरफ्तारी के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अरोड़ा के बिजली, उद्योग और वाणिज्य विभागों की जिम्मेदारियां अन्य मंत्रियों को सौंप दी थीं। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद संजीव अरोड़ा की कानूनी टीम अब सुप्रीम कोर्ट में नियमित जमानत के लिए अपील करने की तैयारी कर रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें रहेंगी।
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