9/11 हमलों के 25 साल बाद भी दुनिया उस सुरक्षा व्यवस्था के प्रभाव में जी रही है, जिसे इन हमलों के बाद लागू किया गया था। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध ने वैश्विक सुरक्षा नीतियों और कानूनी ढांचे में बड़े बदलाव किए। इस दौरान कई ऐसे कानून और व्यवस्थाएं अस्तित्व में आईं, जिनका असर आज भी दिखाई देता है। इन प्रावधानों ने सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर सवाल खड़े किए। आलोचकों का मानना है कि इन व्यवस्थाओं ने असाधारण सरकारी शक्तियों को बढ़ावा दिया। कई मामलों में मानवाधिकारों और निजता को लेकर चिंताएं सामने आईं। सुरक्षा के नाम पर बनाए गए कानूनी ढांचे की लंबे समय से समीक्षा की मांग होती रही है। लेख में इस व्यवस्था को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसमें तर्क दिया गया है कि 9/11 के बाद बना सुरक्षा मॉडल अब भी समाज को प्रभावित कर रहा है। आतंकवाद से निपटने और नागरिक अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन जरूरी बताया गया है। लेखक मौजूदा कानूनी ढांचे में व्यापक बदलाव की वकालत करता है।
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