बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल को लेकर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि विरोध करना लोगों का अधिकार है। अदालत ने सवाल उठाया कि वह किसी के आंदोलन को कैसे रोक सकती है। हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की भूमिका की ओर भी संकेत किया। अदालत के अनुसार आंदोलन को लेकर आवश्यक कदम राज्य सरकार को उठाने चाहिए। मनोज जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी भूख हड़ताल को लेकर अदालत में मामला पहुंचा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आंदोलन और विरोध के अधिकार पर अपनी बात रखी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आंदोलन को रोकने का सवाल सीधे तौर पर उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा जताई। इस मामले में मराठा आरक्षण की मांग और आंदोलन को लेकर आगे की कार्रवाई राज्य सरकार के स्तर पर होगी।
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