पूर्व नक्सली नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा ने हथियार छोड़ने के बाद अपने जीवन में आए बदलावों को साझा किया है। माड़ की पहाड़ियों से निकलकर हथियार छोड़ने और संविधान को स्वीकार करने तक का उनका सफर निर्णायक रहा। 15 अक्टूबर 2025 को वेणुगोपाल के साथ 60 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण के एक साल बाद उन्होंने एक विशेष बातचीत में अपने अनुभव बताए। उन्होंने हथियार छोड़ने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों पर चर्चा की। वेणुगोपाल ने पुलिस के साथ रहे अविश्वास का भी जिक्र किया। उन्होंने आत्मसमर्पण के दिन के अनुभवों को साझा करते हुए उस फैसले के महत्व को समझाया। उनके मुताबिक, हथियार छोड़ने के निर्णय से हजारों कैडरों की जान बच पाई। बीते एक साल के अनुभवों ने उनके फैसले के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है। उनका सफर हिंसा का रास्ता छोड़कर संवैधानिक व्यवस्था को स्वीकार करने के बदलाव को दर्शाता है।
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