छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की उम्र को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड जन्मतिथि का अंतिम प्रमाण नहीं है। वोटर आईडी को भी जन्मतिथि का निर्णायक दस्तावेज नहीं माना जा सकता। पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की निर्धारित आयु साबित करने के लिए वैध दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी। मामले में सरपंच पद की उम्मीदवार की उम्र चुनाव के समय 21 वर्ष से कम पाई गई। इसके बाद उसके चुनाव को लेकर कानूनी सवाल उठे। हाईकोर्ट ने उम्र संबंधी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के आधार पर फैसला दिया। कोर्ट के निर्णय के बाद संबंधित सरपंच का चुनाव रद्द कर दिया गया। फैसले से पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए उम्र संबंधी नियमों की अहमियत सामने आई है। अदालत ने संकेत दिया कि पहचान संबंधी दस्तावेजों को जन्मतिथि का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। चुनाव प्रक्रिया में पात्रता साबित करने के लिए सही और विश्वसनीय रिकॉर्ड जरूरी होंगे। यह फैसला भविष्य के पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों की उम्र के सत्यापन को प्रभावित कर सकता है।
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