बिलासपुर के चर्चित मस्तूरी गोलीकांड और सुपारी किलिंग मामले में कांग्रेस नेता नागेंद्र राय को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता, लंबे समय से फरारी और आपराधिक रिकॉर्ड को फैसले का आधार बनाया। मामला 28 अक्टूबर 2025 को मस्तूरी में हुई फायरिंग से जुड़ा है। ऑफिस के बाहर हुई गोलीबारी में धनेंद्र सिंह और चंद्रकांत सिंह घायल हुए थे। पुलिस जांच में हत्या के लिए दो लाख रुपये की सुपारी दिए जाने का आरोप सामने आया था। पुलिस के मुताबिक इस साजिश में नागेंद्र राय की अहम भूमिका थी। आरोप है कि उन्होंने वारदात के लिए सह-आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराए थे। जांच में अन्य आरोपियों के साथ उनके संपर्क और कथित बैठकों की बात भी सामने आई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में सह-आरोपी तारकेश्वर पाटले के साथ लगातार संपर्क का उल्लेख किया गया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि राजनीतिक रंजिश के चलते नागेंद्र राय को झूठा फंसाया गया है। वहीं शासन ने अदालत को बताया कि आरोपी करीब 10 महीने से फरार है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा। हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
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