मंगलवार सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 7 पैसे कमजोर हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहे। महंगे कच्चे तेल के कारण डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये को नुकसान हुआ। बाजार में डॉलर की लगातार मांग भी रुपये की कमजोरी की एक वजह रही। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने एक फॉरेक्स स्वैप सुविधा बंद की थी। इस कदम का विदेशी मुद्रा प्रवाह पर असर पड़ा है। घरेलू शेयर बाजार भी मंगलवार को कमजोर शुरुआत के साथ खुले। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार की धारणा प्रभावित हुई। शेयर बाजार में कमजोरी ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी प्रवाह पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। आगे रुपये की दिशा वैश्विक तेल कीमतों और डॉलर की मांग से प्रभावित हो सकती है।
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