सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड मीटर लगाने की योजना एक बार फिर शुरू नहीं हो सकी है। बिजली कंपनी ने 100 सरकारी विभागों से तीन महीने के औसत बिल के बराबर एडवांस जमा करने को कहा था। निर्धारित समय तक केवल क्रेडा ने ही राशि जमा की। बाकी 99 विभागों ने न तो भुगतान किया और न ही कंपनी के पत्र का जवाब दिया। सहयोग नहीं मिलने के कारण योजना तीसरी बार टालनी पड़ी है। बिलासपुर संभाग में सरकारी विभागों के 20,577 बिजली कनेक्शन हैं। इन कनेक्शनों पर करीब 800.02 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसमें सबसे ज्यादा बकाया ग्राम पंचायतों और नगर निगमों पर है। केंद्र सरकार की शर्तों के अनुसार सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिलिंग लागू की जानी थी। योजना में देरी के कारण छत्तीसगढ़ को मिलने वाली केंद्रीय सहायता की एक तिहाई राशि प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं में स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध जारी है। बिजली कंपनी का कहना है कि जांच में लगाए गए मीटर तकनीकी रूप से सही पाए गए हैं।
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