छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार को राहत दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का निपटारा 2013 की नीति के अनुसार ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने 2021 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें बाद की शर्तों को पुराने लंबित मामलों पर भी लागू किया जा रहा था। न्यायपीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि वह सभी लंबित आवेदनों पर अगले 90 दिनों के भीतर नए सिरे से विचार करे। यह निर्णय उन हजारों आश्रित परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो सालों से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। अदालत ने माना कि बाद की जटिल शर्तें पुराने मामलों पर थोपना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इस फैसले के बाद राज्य सरकार को अब अनुकंपा नियुक्ति की नियमावली में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य के सभी अनुकंपा नियुक्ति संबंधी विवादों के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। शासन को अब निर्धारित समय सीमा के भीतर कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अंतिम निर्णय लेना होगा। प्रभावित परिवारों में इस अदालती आदेश के बाद नई उम्मीद की किरण जगी है।
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