पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नशा तस्करी के मामले में बंद रसाल सिंह विक्की की पैरोल याचिका स्वीकार कर ली। तरनतारन प्रशासन ने आशंका जताई थी कि रिहाई के बाद वह पाकिस्तान से ड्रग्स और हथियार मंगवाकर तस्करी कर सकता है। प्रशासन ने इसे राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए पैरोल का विरोध किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आशंका या पाकिस्तान से संबंध की बात के आधार पर पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने 26 जून 2026 को पैरोल आवेदन खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया। अधिकारियों को नियमों के अनुसार आवेदन पर नए सिरे से विचार करने और 30 दिनों में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। मामला 26 मार्च 2022 को भिखीविंड क्षेत्र में पुलिस की विशेष नाकेबंदी के दौरान शुरू हुआ था। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधि के आधार पर रसाल सिंह को रोककर तलाशी ली थी। पुलिस के अनुसार उसके पास से कमर्शियल मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद हुआ था। इस मामले में भिखीविंड थाने में FIR नंबर 30 दर्ज कर NDPS एक्ट की धारा 22-C लगाई गई थी। FSL जांच में बरामद पदार्थ के नशीला होने की पुष्टि के बाद पुलिस ने विशेष NDPS अदालत में चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और बचाव पक्ष ने बरामदगी की प्रक्रिया तथा गवाहों के बयानों पर सवाल उठाए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी ठहराकर सजा और जुर्माना सुनाया था। बाद में DC तरनतारन द्वारा पैरोल आवेदन खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन सुरक्षा खतरे के दावे के समर्थन में ठोस जांच या पर्याप्त सामग्री पेश नहीं कर सका।
Source: Source