भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज’ (Astrobase Space Technologies) एक ऐसे रॉकेट इंजन पर काम कर रहा है, जो ‘फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन’ (Full-flow staged combustion) तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक इतनी जटिल है कि वर्तमान में दुनिया भर में केवल स्पेसएक्स (SpaceX) का ‘रैप्टर’ इंजन ही इसे सफलतापूर्वक उड़ा पाया है। इस इंजन की खासियत यह है कि यह मीथेन और लिक्विड ऑक्सीजन के संयोजन का उपयोग करता है, जो रीयूजेबल (पुनः उपयोग योग्य) रॉकेट के लिए सबसे कुशल माना जाता है। इस इंजन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका एक यूनिट 50 से अधिक बार उड़ान भर सके, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत में भारी कमी आएगी। एस्ट्रोबेस ने आंध्र प्रदेश में भारत की पहली मीथेन-आधारित रॉकेट इंजन परीक्षण सुविधा भी स्थापित की है। भारत सरकार की संस्था IN-SPACe ने इस स्टार्टअप को अपने 500 करोड़ रुपये के ‘टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड’ के पहले तीन लाभार्थियों में शामिल किया है। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक अपना पहला कक्षीय (ऑर्बिटल) रॉकेट लॉन्च करना है।
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