भारत की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स लगभग छह वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे भारतीय रिजर्व बैंक की आरक्षित परिसंपत्ति रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की बढ़ती अहमियत इस बदलाव का प्रमुख कारण है। वर्ष 2022 में पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा फ्रीज कर दिया गया था। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों का ध्यान सोने की ओर आकर्षित किया। इसके बाद सोने को अधिक सुरक्षित आरक्षित संपत्ति के रूप में देखा जाने लगा। सोना किसी एक देश की वित्तीय प्रणाली पर निर्भर नहीं होता। यही कारण है कि कई देश अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार के संतुलन पर ध्यान दे रहा है। विशेषज्ञ इसे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा की रणनीति का हिस्सा मानते हैं। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में आरक्षित परिसंपत्तियों का विविधीकरण महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यह रुझान भारत की भविष्य की वित्तीय रणनीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
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