कलकत्ता हाई कोर्ट ने रेल दुर्घटना से जुड़े एक मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि मृतक के पास टिकट न मिलने मात्र से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। यदि अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों से यह साबित हो जाए कि मृतक वैध यात्री था, तो उसका दावा स्वीकार किया जा सकता है। मामले में अपीलकर्ताओं ने बताया कि मृतक ने 1 अक्टूबर 2018 को बैद्यबाती से बेलूर तक आने-जाने का टिकट खरीदा था। बेलूर में काम पूरा करने के बाद वह वापसी के लिए बांदेल लोकल ट्रेन में सवार हुआ। ऋषड़ा और सेरामपुर स्टेशनों के बीच सफर के दौरान वह ट्रेन से गिर गया। इस दुर्घटना में उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का मूल्यांकन किया। हाई कोर्ट ने माना कि केवल टिकट का मृतक के पास न मिलना पर्याप्त आधार नहीं है। अन्य प्रमाण यात्रा की वास्तविकता स्थापित कर सकते हैं। अदालत ने इसी आधार पर मुआवजे का दावा स्वीकार करने का निर्देश दिया। यह फैसला भविष्य के ऐसे मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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