न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर विवाद के बाद NCERT ने इसे संशोधित करने का फैसला किया है। यह विवाद पुस्तक के फरवरी में प्रकाशित होने के तुरंत बाद शुरू हुआ, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उसकी मुद्रित और डिजिटल प्रतियां वापस लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अध्याय से यह गलत धारणा बनती है कि न्यायपालिका ने संस्थागत भ्रष्टाचार को स्वीकार किया है, जबकि संविधान की रक्षा, मौलिक अधिकारों के संरक्षण और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में उसकी भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसके बाद NCERT ने इस सामग्री को शामिल किए जाने को ‘निर्णय में त्रुटि’ बताते हुए खेद व्यक्त किया और अध्याय को नए सिरे से लिखने की घोषणा की। संशोधित संस्करण में न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारियों, जनहित याचिका (PIL) की भूमिका और न्याय व्यवस्था के महत्व को अधिक संतुलित और तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
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