छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान सर्पदंश के मामलों में हर साल बढ़ोतरी होती है। इसके बावजूद पिछले साढ़े तीन वर्षों में मौतों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। इस अवधि में करीब 29 हजार सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए। इनमें 345 लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान इसका प्रमुख कारण है। अब अधिकांश लोग ओझा-गुनिया और झाड़-फूंक के बजाय सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं। समय पर इलाज मिलने से 25 हजार से अधिक लोगों की जान बचाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सर्पदंश के बाद सही उपचार की जानकारी दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच बेहतर हुई है। इससे उपचार में देरी कम हुई है। सरकार सर्पदंश से मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा देती है। प्रशासन लोगों से किसी भी तरह के अंधविश्वास से बचने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों ने सर्पदंश की स्थिति में तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी है। जागरूकता और त्वरित उपचार ने राज्य में मृत्यु दर घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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