उत्तर प्रदेश 70 से अधिक भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग के साथ देश की जीआई राजधानी के रूप में उभरकर सामने आया है। राज्य के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज के इत्र जैसे उत्पाद इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्ष 2014 के बाद जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक लाभ मिलने लगा है। जीआई टैग ने पारंपरिक उत्पादों की ब्रांड पहचान को मजबूत किया है। निर्यात में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे नई गति मिली है। वाराणसी 32 जीआई टैग के साथ राज्य में सबसे आगे है। यह मॉडल स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का सफल उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
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