फेशियल रिकग्निशन तकनीक इंसानों की तरह किसी चेहरे को पहचानने का काम नहीं करती। यह चेहरे की अलग-अलग विशेषताओं का विश्लेषण करती है। मशीन इन विशेषताओं को आंकड़ों या गणितीय पैटर्न में बदल देती है। इसके बाद वह इन आंकड़ों की तुलना किसी दूसरी तस्वीर से करती है। सिस्टम यह आकलन करता है कि दोनों चेहरों के पैटर्न कितने समान हैं। यानी तकनीक किसी व्यक्ति को सीधे पहचानने के बजाय समानता का स्तर मापती है। इसी आधार पर किसी चेहरे के संभावित मिलान का अनुमान लगाया जाता है। तकनीक की सटीकता इस्तेमाल किए गए सिस्टम और डेटा पर निर्भर करती है। तस्वीर की गुणवत्ता भी पहचान के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। रोशनी, चेहरे का कोण और तस्वीर की स्पष्टता जैसे कारक अहम होते हैं। इसलिए फेशियल रिकग्निशन के नतीजों को हमेशा पूर्ण सत्य नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में इसके परिणामों की अतिरिक्त जांच जरूरी हो सकती है।
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