कर्नाटक भाजपा ने विधान परिषद चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग की जांच के लिए धर्मस्थल में शपथ दिलाने की योजना वापस ले ली है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने धार्मिक स्थल का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर आपत्ति जताई। उनका मानना था कि इससे गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है। इसके बाद भाजपा ने वैकल्पिक जांच प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया। क्रॉस वोटिंग करने वाले नेताओं की पहचान के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई है। समिति मामले की विस्तृत जांच करेगी। भाजपा के दोनों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे थे। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व क्रॉस वोटिंग की शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है। जांच का उद्देश्य पार्टी अनुशासन बनाए रखना बताया गया है। समिति विभिन्न स्तरों पर जानकारी जुटाएगी। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। पार्टी इस मामले में संगठनात्मक कार्रवाई पर भी विचार कर सकती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक प्रक्रियाओं को अलग रखना जरूरी है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है।
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