कर्नाटक सरकार अपनी लोकप्रिय मुफ्त बिजली योजना ‘गृह ज्योति’ (Gruha Jyothi) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। ऑडिट के दौरान यह खुलासा हुआ है कि राज्य में 10 लाख से अधिक ऐसे लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं जो मतदाता नहीं हैं, साथ ही कई मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई दावे किए जाने की अनियमितताएं भी पाई गई हैं। इन विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार अब सख्त पात्रता मानदंड लागू कर रही है। अब लाभार्थियों की पहचान के लिए मतदाता सत्यापन (voter verification) अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, भ्रष्टाचार और दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रति लाभार्थी केवल एक ‘रेवेन्यू रजिस्टर नंबर’ (Revenue Register number) को ही अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, योजना के तहत मिल रही मुफ्त बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल (commercial diversion) करने वालों पर भी सरकार की कड़ी नज़र है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि कल्याणकारी योजनाएं केवल राज्य के वास्तविक निवासियों और पात्र नागरिकों के लिए हैं, न कि बाहरी लोगों या धोखाधड़ी करने वालों के लिए। इस कदम से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला अनावश्यक बोझ कम होगा और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ सही ढंग से पहुंच सकेगा।
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