भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब चंद्रमा पर अपने मिशन की अवधि को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। इसरो प्रमुख ने घोषणा की है कि वे परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के साथ मिलकर एक ऐसे लैंडर का विकास करेंगे जो चंद्रमा की सतह पर 200 दिनों तक जीवित रह सके और काम कर सके। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रयान-3 का ‘विक्रम’ लैंडर केवल 14 पृथ्वी दिवस (एक चंद्र दिवस) तक ही सक्रिय रह पाया था। 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के बाद, इसरो केवल दो सप्ताह के लिए ही बहुमूल्य डेटा एकत्र कर सका था। अब इसरो की योजना इस सीमा को काफी आगे ले जाने की है। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय मंत्री के मार्गदर्शन में डीएई के साथ मिलकर काम करते हुए ऐसे उपकरण विकसित किए जाएंगे, जिससे लैंडर की उम्र 200 दिनों तक बढ़ जाएगी। यह तकनीक भविष्य के लूनर मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। लंबे समय तक सक्रिय रहने से वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह के रहस्यों को और अधिक गहराई से समझ सकेंगे। इसरो का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
Source: Source