पश्चिम बंगाल का एक छोटा सा राजनीतिक दल, नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI), अचानक सुर्खियों में आ गया है। इस पार्टी ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों को अपने पाले में शामिल कर लिया है, जिससे देश की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा हो गई है। वित्तीय रूप से बेहद मामूली इतिहास रखने वाली इस पार्टी का चुनावी प्रदर्शन भी अब तक बेहद कमजोर रहा है। हाल ही में त्रिपुरा के चुनावों में एनसीपीआई को केवल 822 वोट ही मिले थे, जिसके बाद से उसकी राजनीतिक हैसियत पर कई सवाल उठ रहे हैं। महज 75 रुपये की बैंक बैलेंस वाली यह पार्टी अब अचानक एक बड़े संसदीय समूह का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। इस बदलाव ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को भी उजागर कर दिया है। हावड़ा में स्थित एनसीपीआई का मुख्यालय अब राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र बन चुका है। बागी सांसदों का इस अनजान दल के साथ जुड़ना भविष्य की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह है कि यह नया गठबंधन राष्ट्रीय राजनीति में क्या नया मोड़ लाता है।
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