कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी शुरुआती चरण में है। अमेरिका की एआई कंपनियां ओपनएआई और एंथ्रोपिक बहु-अरब डॉलर के संभावित सार्वजनिक सूचीकरण की ओर बढ़ रही हैं। इसके विपरीत, भारत अभी एआई आधारित बड़े वैश्विक कारोबार और तकनीकी नेतृत्व के मामले में पीछे दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद पहली बार भारतीय कंपनियां एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के शीर्ष 10 घटकों से बाहर हो सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक निवेशकों के बीच बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है। उदाहरण के तौर पर ताइवान की चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी अकेले ही वहां के प्रमुख शेयर सूचकांक का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा रखती है। टीएसएमसी के उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स दुनिया के प्रमुख एआई मॉडलों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि एआई क्रांति में हार्डवेयर और चिप निर्माण की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत के पास विशाल तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल बाजार मौजूद है, लेकिन उन्नत चिप निर्माण और एआई अनुसंधान में अभी और निवेश की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं के दम पर वैश्विक एआई नेतृत्व हासिल करना कठिन होगा। भारत को अनुसंधान, नवाचार और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण पर अधिक ध्यान देना होगा। एआई क्षेत्र में अवसर बड़े हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदलने के लिए दीर्घकालिक रणनीति आवश्यक होगी। फिलहाल भारत का एआई क्षण पूरी तरह नहीं आया है, लेकिन उसकी नींव तैयार होती दिखाई दे रही है।
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