तृणमूल कांग्रेस में जारी राजनीतिक विवाद के बीच अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने बागी सांसदों के समूह को ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता न देने का आग्रह किया है। यह कदम उन बागी सांसदों की बैठक से पहले उठाया गया, जो स्वयं को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताकर अलग पहचान की मांग कर रहे हैं। ममता बनर्जी खेमे के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने अभिषेक बनर्जी का पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा। यह पत्र 10 जून को तैयार किया गया था और पहले ईमेल के माध्यम से भी भेजा गया था। पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के गठन की अनुमति नहीं देता। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी की आधिकारिक पहचान और संगठनात्मक अधिकार उसके मौजूदा नेतृत्व के पास हैं। बागी गुट द्वारा अलग मान्यता की मांग को पार्टी ने अनुचित बताया है। इस मुद्दे ने संसद और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दोनों पक्ष खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह विवाद आगे कानूनी और संसदीय स्तर पर और गहरा सकता है। लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
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