विकासखंड शंकरगढ़ में समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए प्रस्तावित डोर-टू-डोर सर्वे को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जनपद सभाकक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में विकासखंड के सभी 28 संकुलों के संकुल समन्वयकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में रहने वाले दिव्यांग बच्चों की पहचान करना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का आकलन करने की प्रक्रिया समझाई गई। अधिकारियों ने सर्वे प्रपत्रों के सही संधारण और आंकड़ों के संकलन की जानकारी दी। दिव्यांग बच्चों की पहचान के मानदंडों और सत्यापन प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों के सवालों का समाधान करते हुए सर्वे को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि समावेशी शिक्षा को सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। सर्वे के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो शिक्षा से वंचित हैं या जिन्हें विशेष सहयोग की जरूरत है। इसके आधार पर उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहायता, संसाधन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
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