मुंबई में जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को भारी विरोध और बदसलूकी का सामना करना पड़ रहा है। झुग्गी बस्तियों से लेकर पॉश हाउसिंग सोसायटियों तक, कर्मचारी लोगों के गुस्से और दुर्व्यवहार के शिकार हो रहे हैं। कई निवासी जनगणना के उद्देश्य को लेकर बेहद संशय में हैं। लोगों के मन में डर है कि यह डेटा सरकारी टैक्स बढ़ाने या सब्सिडी बंद होने का कारण बन सकता है। कई स्थानों पर लोगों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं और कर्मचारियों को अंदर आने से मना कर दिया है। कुछ मामलों में तो कर्मचारियों को डराने के लिए उन पर कुत्ते तक छोड़ दिए गए हैं। इतना ही नहीं, कई लोगों ने जनगणना कार्य की वीडियो रिकॉर्डिंग तक की है, जो कर्मचारियों के लिए मानसिक दबाव का कारण बन रही है। यह स्थिति नागरिकों और सरकारी संस्थाओं के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है। डेटा संग्रह की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में आ रही बाधाएं प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। जनगणना का काम समय सीमा के करीब है, लेकिन इस तरह का विरोध कार्य की गति को प्रभावित कर रहा है। सुरक्षा की कमी के कारण कर्मचारी डरे हुए हैं और अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे हैं।
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