रायपुर की मोजो मशरूम फैक्ट्री से जुड़ा मामला अब गंभीर मोड़ पर है। घटना के 199 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने संचालक विमल चेतान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। 109 बच्चों से जुड़े इस मामले में एफआईआर दर्ज न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस और फैक्ट्री संचालक के बीच मिलीभगत हो सकती है। लंबे समय तक कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश है। पुलिस की इस ढिलाई को न्याय में बाधा के रूप में देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया जा रहा है। यह मामला बाल अधिकारों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। छह महीने का समय बीतने के बावजूद मुख्य आरोपी का मुक्त घूमना सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। अब इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। पीड़ितों को आज भी न्याय का बेसब्री से इंतजार है।
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