जालंधर में न्याय की आस में थाने पहुंची एक महिला और उसके परिवार पर दूसरे पक्ष के लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में ही बेरहमी से हमला कर दिया। इस हिंसक वारदात में पीड़ित महिला की एक बाजू टूट गई है और उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान आए हैं। पीड़िता का आरोप है कि जब दबंग उन पर हमला कर रहे थे, तब वहां मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें बचाने के बजाय मूकदर्शक बने रहे। पीड़ित परिवार का दावा है कि हमले के दौरान पुलिसकर्मी बीच-बचाव करने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने में व्यस्त थे। पुलिस की इसी ढुलमुल कार्यप्रणाली और लापरवाही का फायदा उठाकर सभी हमलावर वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए। दोनों पक्षों के बीच पहले से ही कोई विवाद चल रहा था, जिसके शांतिपूर्ण हल और राजीनामे के लिए पुलिस ने उन्हें रात करीब 9 बजे थाने बुलाया था। घटना के आधा घंटा बीत जाने के बाद भी थाने में मौजूद किसी भी ड्यूटी अफसर या पुलिसकर्मी ने पीड़ित परिवार की सुध नहीं ली। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस न तो उनकी शिकायत दर्ज कर रही है और न ही उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज रही है। महिला ने पुलिस प्रशासन पर आरोपियों के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता ने अंदेशा जताया है कि पुलिस अब आरोपियों को बचाने के लिए उन पर जबरन आपसी समझौते और माफीनामे का दबाव बना सकती है। गंभीर रूप से घायल महिला का कहना है कि उनकी बाजू तोड़कर उन्हें अपाहिज कर दिया गया है, इसलिए वे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगी।
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