साल 1907 में रसायनशास्त्री लियो बेकलैंड ने एक ऐसी खोज की जिसने आधुनिक उद्योग और दैनिक जीवन को नई दिशा दी। उनकी लगातार शोध और वैज्ञानिक प्रयासों से दुनिया का पहला पूर्णतः कृत्रिम प्लास्टिक ‘बेकलाइट’ विकसित हुआ। यह खोज किसी संयोग का परिणाम नहीं थी, बल्कि वर्षों के सुनियोजित प्रयोगों का नतीजा थी। बेकलैंड ने फिनॉल और फॉर्मल्डिहाइड को नियंत्रित तापमान और दबाव में मिलाकर एक नया पदार्थ तैयार किया। इसके लिए उन्होंने विशेष बंद पात्र में प्रयोग किए। परिणामस्वरूप एक कठोर और टिकाऊ प्लास्टिक का निर्माण हुआ। बेकलाइट विद्युत का अच्छा कुचालक था, जिससे इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तेजी से बढ़ा। यह सामग्री गर्मी और रसायनों के प्रति भी अपेक्षाकृत अधिक प्रतिरोधी थी। इसकी सफलता ने औद्योगिक उत्पादन में नए अवसर पैदा किए। बाद के वर्षों में प्लास्टिक उद्योग के विस्तार की नींव इसी आविष्कार ने रखी। घरेलू सामान से लेकर संचार उपकरणों तक, बेकलाइट का व्यापक उपयोग हुआ। इस खोज ने विनिर्माण क्षेत्र में लागत और उत्पादन प्रक्रिया को भी प्रभावित किया। विशेषज्ञ इसे आधुनिक प्लास्टिक युग की शुरुआत मानते हैं। बेकलैंड का यह आविष्कार विज्ञान और उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
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