हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर नियंत्रण के लिए राज्य के 10,892 गंभीर अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया है। इस डेटाबेस में हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों का पूरा आपराधिक इतिहास और गतिविधियों का विवरण शामिल है। पुलिस का कहना है कि इस डेटा आधारित प्रणाली से अपराध की संभावना को पहले ही पहचाना जा सकेगा। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में पंचकूला में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस मॉडल की समीक्षा की गई। बैठक में रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद में चल रही आरजेएसएफ यूनिट की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अपराधियों को अलग-अलग जोखिम श्रेणियों में बांटा गया है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कौन दोबारा अपराध कर सकता है या गैंग से जुड़ सकता है। पुलिस केवल सक्रिय अपराधियों ही नहीं, बल्कि संभावित गैंग सदस्यों पर भी नजर रख रही है। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होकर अब कई जिलों में लागू की जा चुकी है। STF ने पिछले तीन वर्षों में 941 गैंगस्टर और सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 2024 में 323, 2025 में 470 और 2026 में अब तक 148 गिरफ्तारियां शामिल हैं। इसके अलावा STF ने 22 वांछित गैंगस्टरों को विदेशों से डिपोर्ट या प्रत्यर्पित कर भारत लाया है। 14 अन्य गैंगस्टरों को विभिन्न देशों में हिरासत में लेकर भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। यह पूरी कार्रवाई अपराध नियंत्रण में तकनीक और इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।
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