भारत के हाउसिंग मार्केट में अब बदलाव देखा जा रहा है, जहां घर खरीदने का फैसला सिर्फ ऑफिस की दूरी के आधार पर नहीं हो रहा है। लोग अब अपने काम, जीवन और समय के बीच संतुलन को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर यह देखा जा रहा है कि कितनी बार ऑफिस जाना जरूरी है, यह सवाल रियल एस्टेट फैसलों को प्रभावित कर रहा है। वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण लोगों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब खरीदार ऐसे घरों की तलाश कर रहे हैं जो बेहतर जीवनशैली और सुविधा प्रदान करें। शहरों के बाहरी इलाकों में भी रिहायशी मांग बढ़ रही है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रह सकता है। परिवार अब बड़े और सुविधाजनक घरों को अधिक महत्व दे रहे हैं। ऑफिस लोकेशन की बजाय जीवन की गुणवत्ता अधिक अहम हो गई है। इससे हाउसिंग मार्केट की दिशा धीरे-धीरे बदल रही है। डिजिटल वर्क कल्चर ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है।
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