यूसी सैन डिएगो के एक अभूतपूर्व अध्ययन से पता चला है कि उन्नत AI अब ट्यूरिंग टेस्ट पास करने में सक्षम हो गया है। इसका मतलब है कि AI मानवीय बातचीत, लहजे और यहाँ तक कि गलतियों को भी समझाने लगा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागी इंसानों और GPT-4.5 जैसे परिष्कृत AI मॉडल के बीच अंतर करने में संघर्ष कर रहे थे। AI अब इतना उन्नत हो गया है कि वह इंसानों की तरह ही मुहावरे, भावनाएँ और छोटी-मोटी अशुद्धियाँ पैदा कर सकता है। इस खोज ने ऑनलाइन विश्वास को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों को डर है कि इसका दुरुपयोग फर्जी समीक्षाओं, सोशल मीडिया बॉट्स या धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। AI के इस ‘हाइपर-रियलिस्टिक’ व्यवहार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भविष्य में हम ऑनलाइन किसी इंसान पर कैसे भरोसा कर पाएंगे। अब नियामकों और टेक कंपनियों के सामने AI के इस नए खतरे से निपटने की चुनौती है।
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