दक्षिण अफ्रीका की ब्लोम्बोस गुफा में मिली एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज ने मानव इतिहास की समझ को नया आयाम दिया है। वैज्ञानिकों को यहां 73,000 वर्ष पुराना गेरू (ओखर) का एक टुकड़ा मिला, जिस पर लाल रंग की क्रॉस-हैच्ड यानी जालीदार रेखाएं बनी हुई थीं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये निशान जानबूझकर बनाए गए थे। इस खोज ने चित्रांकन के सबसे पुराने ज्ञात प्रमाण को लगभग 30,000 वर्ष पीछे धकेल दिया है। इससे पहले माना जाता था कि मानव द्वारा चित्र बनाने की शुरुआत कहीं बाद में हुई थी। गुफा से प्राप्त नमूने का सूक्ष्मदर्शी और रासायनिक विश्लेषण किया गया। जांच में संकेत मिले कि रेखाएं किसी प्राकृतिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि मानव द्वारा बनाई गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का पैटर्न बनाने के लिए योजना और उद्देश्य की आवश्यकता होती है। यह खोज प्रारंभिक मानवों की बौद्धिक क्षमता और प्रतीकात्मक सोच का प्रमाण मानी जा रही है। इससे पता चलता है कि उस समय के लोग विचारों को दृश्य रूप में व्यक्त करने में सक्षम थे। शोध के निष्कर्ष मानव कला और संचार के विकास पर स्थापित कई धारणाओं को चुनौती देते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज दर्शाती है कि रचनात्मक अभिव्यक्ति और प्रतीकात्मक व्यवहार मानव इतिहास में पहले से कहीं अधिक प्राचीन हैं।
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