मोहन नगर थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी सगे चाचा को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का माना है। न्यायालय ने मृतका के परिजनों को आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपए की सहायता देने का निर्देश दिया है। मृत्युदंड की अंतिम पुष्टि बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा की जानी है। यह घटना 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी के दिन हुई थी। बच्ची पड़ोस में स्थित अपनी बुआ-दादी के घर नवकन्या भोज के लिए गई थी और सुबह करीब 10 बजे के बाद लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तलाश शुरू की और उसी रात करीब 9 बजे उसका शव पास खड़ी एक कार में छिपा मिला। जांच के लिए एएसपी पद्मश्री तंवर और टीआई शिव चंद्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। पुलिस जांच में डीएनए, एफएसएल रिपोर्ट और आरोपी के मेमोरेंडम बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की मौत अत्यधिक चोट और सदमे के बाद कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर से हुई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले तीन महीने से उसी घर की छत पर बने कमरे में रह रहा था। अदालत ने 163 पन्नों के फैसले में वैज्ञानिक साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों का उल्लेख किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने बच्ची की मौत के बाद शव को पड़ोस की कार में सीटों के बीच छिपा दिया था। आरोपी घटना के दो दिन बाद से जेल में बंद था और करीब 17 महीने पांच दिन बाद अदालत ने उसे मृत्युदंड और अर्थदंड की सजा सुनाई।
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