5G के बाद दुनिया अब 6G टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत भी 6G के विकास और वैश्विक मानकों को तय करने में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। भारत समेत 26 देश नई पीढ़ी की मोबाइल तकनीक के नियमों पर मिलकर काम करेंगे। इस पहल का उद्देश्य 6G तकनीक के लिए साझा वैश्विक मानक तैयार करना है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग से जुड़ी पहल में भारत की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 6G तकनीक से मोबाइल नेटवर्क की गति और क्षमता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। नई तकनीक में कम लेटेंसी और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया जाएगा। 6G का इस्तेमाल भविष्य में स्मार्ट शहरों और औद्योगिक ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में बढ़ सकता है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को भी इससे फायदा मिलने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर एक समान तकनीकी मानक तैयार करना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है। भारत इस प्रक्रिया में अपनी तकनीकी क्षमता और नीतिगत प्राथमिकताओं को सामने रख सकेगा। 6G के मानकों को लेकर देशों के बीच सहयोग से नई तकनीक के विकास को गति मिल सकती है। भारत पहले ही 6G अनुसंधान और विकास को लेकर अपनी तैयारियां आगे बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में 6G नेटवर्क वैश्विक डिजिटल ढांचे का अहम हिस्सा बन सकता है। 26 देशों का यह सहयोग नई पीढ़ी की वायरलेस कनेक्टिविटी के लिए दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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