सरकार ने देशभर में परित्यक्त और निष्क्रिय पड़ी खदानों को लेकर बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। संबंधित अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2028 तक सभी परित्यक्त खदानों को बंद करने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरणीय जोखिमों को कम करना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लंबे समय से बंद पड़ी खदानें कई क्षेत्रों में दुर्घटनाओं और प्रदूषण का कारण बनती रही हैं। सरकार इन स्थलों की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से उनके बंदीकरण की प्रक्रिया पूरी करेगी। खदानों के वैज्ञानिक पुनर्वास और भूमि पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी। साथ ही भूजल, मिट्टी और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। योजना के तहत संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परित्यक्त खदानों का सुरक्षित बंदीकरण सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। सरकार ने इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। आने वाले वर्षों में इस दिशा में व्यापक कार्यवाही देखने को मिल सकती है।
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