1980 के दशक की शुरुआत में जब पाकिस्तान परमाणु हथियार विकसित करने के करीब पहुंच रहा था, तब कथित रूप से भारत और इजरायल के बीच उसके कहुटा स्थित परमाणु स्थल को निशाना बनाने की एक संभावित योजना पर विचार किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका उद्देश्य पाकिस्तान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस तरह की किसी भी सैन्य कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी थी और योजना आगे नहीं बढ़ सकी। यह विषय अब ऐतिहासिक और रणनीतिक चर्चाओं में फिर से चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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